“विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा), 1999” और “धन शोधन निवारण अधिनियम (पी एम एल ए), 2002” को लागू करना।
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“विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा), 1999” और “धन शोधन निवारण अधिनियम (पी एम एल ए), 2002” के प्रावधानों के उल्लंघन से संबंधित आसूचना एकत्र करना व उसको विकसित करना।
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संदिग्ध व्यक्तियों, वाहनों और परिसरों की तलाशी करना और अभिशंसी सामग्री (जिसमें भारतीय तथा विदेशी मुद्रा शामिल है) जब्त करना।
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“विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा), 1999” और “धन शोधन निवारण अधिनियम (पी एम एल ए), 2002” के प्रावधानों के उल्लंघनों के संबंध में पूछताछ तथा जांच पड़ताल करना।
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विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा), 1999 के उल्लंघन संबंधी मामलों का न्यायनिर्णयन करना और यदि किन्हीं मामलों में उल्लंघन साबित हो जाता है तो उस पर विभागीय शास्तियां (जुर्माना) लगाना और उल्लंघन में संलिप्त राशि/सम्पत्ति को जब्त करना।
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विभागीय न्यायनिर्णयन में लगाई गई शास्तियों (जुमाने) की वसूली करना।
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“धन शोधन निवारण अधिनियम (पी एम एल ए), 2002” में अंतर्ग्रस्त संपत्तियों की जब्ती और कुर्की करना।
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“धन शोधन” के अपराध में संलिप्त संदिग्ध व्यक्तियों को गिरफ्तार करना।
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“धन-शोधन” के अपराध में संलिप्त संदिग्ध व्यक्तियों पर अभियोग चलाना।
विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम व धन शोधन निवारण अधिनियम से संबंधित उपरोक्त कार्यो के अलावा निदेशालय विदेशी मुद्रा संरक्षण और तस्करी निवारण अधिनियम (कोफेपोसा), 1974 के अंतर्गत आभ्यासिक अपराधियों को नजरबंद करने के मामलों में कार्यवाही करता है तथा सिफारिश करता है जिसके अन्तर्गत अन्य बातों के साथ-साथ देश की विदेशी मुद्रा के संरक्षण तथा आवर्धन को हानि पहॅुचाने के कार्य करने वाले व्यक्ति को एक वर्ष की अवधि के लिए नजरबंद करने की व्यवस्था है।